देहरादून। प्रदेश सरकार ने लंबे समय से लंबित शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को पटरी पर लाने के लिए बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद शिक्षकों की पदोन्नति के लिए अध्यादेश लाने पर सहमति बन गई है। इस अध्यादेश के जरिए सेवा नियमावली में संशोधन कर पदोन्नति से जुड़े विवादों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदोन्नति के पदों की भारी कमी शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और प्रवक्ता के पद खाली हैं, जिससे विद्यालयों का संचालन प्रभावित हो रहा है। पहले भी राज्य में सैकड़ों स्कूल बिना प्रधानाचार्य और हेडमास्टर के संचालित होने की स्थिति सामने आ चुकी है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ा है।
पदोन्नति प्रक्रिया कोर्ट में लंबित मामलों के कारण वर्षों से अटकी हुई है। इस वजह से शिक्षकों में असंतोष बढ़ा है और कई शिक्षक 30-32 साल की सेवा के बाद भी बिना पदोन्नति सेवानिवृत्त हो रहे हैं। शिक्षक लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकार कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन पदोन्नति दे, ताकि खाली पद भी भर सकें और उनका हक भी मिल सके।
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार शिक्षकों के हितों को लेकर गंभीर है और पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानांतरण और पदोन्नति शिक्षकों के अधिकार हैं और सरकार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार को उम्मीद है कि अध्यादेश लागू होने के बाद पदोन्नति का रास्ता साफ होगा और स्कूलों में रिक्त पद भरने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा।
