लखनऊ। महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुलाए गए विशेष सत्र पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने सरकार की मंशा और तैयारी दोनों पर सवाल उठाते हुए चर्चा के लिए तय समय को अपर्याप्त बताया है।
कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण और व्यापक प्रभाव वाले विषय पर महज पांच घंटे की चर्चा पर्याप्त नहीं हो सकती। उन्होंने मांग की कि विशेष सत्र की अवधि बढ़ाई जाए, ताकि सभी पक्ष विस्तार से अपनी बात रख सकें। उनका कहना है कि महिला आरक्षण केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों और भागीदारी से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।
आराधना मिश्रा ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं दिख रही और जल्दबाजी में निर्णय लेना चाहती है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह महिला आरक्षण के समर्थन में है, लेकिन इस पर व्यापक और ठोस बहस जरूरी है।
वहीं, सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने विशेष सत्र के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक केंद्र सरकार और संसद के अधिकार क्षेत्र का विषय है, इसलिए राज्य विधानसभा में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नियमावली का हवाला देते हुए कहा कि जो विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, उस पर बहस या मतदान नहीं कराया जाना चाहिए।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने विपक्ष के रुख पर निराशा जताते हुए कहा कि यह मुद्दा पूरे देश और प्रदेश की महिलाओं से जुड़ा है, इसलिए इस पर चर्चा जरूरी है।
एक दिवसीय विशेष सत्र में लाए गए प्रस्ताव को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच मतभेद साफ नजर आ रहे हैं, जिससे आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
