देहरादून। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उत्तराखंड में कांग्रेस संगठनात्मक कमजोरी से जूझती नजर आ रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल बीते छह महीनों से बिना पूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी (पीसीसी) के ही पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं, जिससे चुनावी रणनीति को अपेक्षित धार नहीं मिल पा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी चुनावी लड़ाई में मजबूत टीम का होना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में अकेले अध्यक्ष के लिए संगठन को सक्रिय और प्रभावी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बन गया है। प्रदेश में 2017 से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस 2027 में वापसी के दावे तो कर रही है, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर सुस्ती चिंता का विषय बनी हुई है।

गौरतलब है कि पार्टी हाईकमान ने नवंबर 2025 में गोदियाल को दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। इससे पहले वे 22 जुलाई 2021 से 10 अप्रैल 2022 तक इस पद पर रह चुके हैं। उनसे पहले करन माहरा भी अध्यक्ष रहे, लेकिन वे भी नई टीम गठित नहीं कर पाए थे।

सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कार्यकारिणी के लिए नामों की सूची हाईकमान को भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक उस पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। नई कार्यकारिणी के गठन तक पुरानी टीम ही कामकाज संभाल रही है, जिससे संगठनात्मक गतिविधियों में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही।

इस बीच पार्टी नेतृत्व ने प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत को चुनाव अभियान और प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है। गोदियाल का कहना है कि जिला और ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही पीसीसी की घोषणा कर संगठन को मजबूती दी जाएगी।