नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने बांग्लादेश भेजे गए कथित ‘संदिग्ध विदेशियों’ की भारत वापसी से जुड़े संवेदनशील मामले में केंद्र सरकार को कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने सरकार को अपना स्पष्ट रुख रखने के लिए “आखिरी मौका” देते हुए चेतावनी दी कि निर्देशों का पालन न होने पर वह अंतिम सुनवाई के साथ आगे बढ़ेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल हैं, ने केंद्र के वकील से मामले में निर्देश लेकर अगली तारीख पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। याचिकाकर्ता भोडू शेख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने दलीलें पेश कीं।
मामला उन लोगों से जुड़ा है जिन्हें कथित तौर पर बिना पर्याप्त जांच के बांग्लादेश सीमा पार भेज दिया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनका परिवार पिछले दो दशकों से दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरी कर रहा था, लेकिन पिछले साल जून में पुलिस ने उन्हें बांग्लादेशी होने के शक में पकड़कर सीमा पार धकेल दिया।
इस प्रकरण में मानवीय पहलू भी सामने आया है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गर्भवती महिला सुनाली खातून और उसके आठ वर्षीय बच्चे को भारत लौटने की अनुमति दी थी। अदालत ने राज्य प्रशासन को महिला के इलाज और सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, केंद्र सरकार ने उन्हें बांग्लादेशी नागरिक बताते हुए उनके भारतीय नागरिकता के दावे का विरोध किया है।
गौरतलब है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने 26 सितंबर 2025 को इस निर्वासन को गैरकानूनी करार देते हुए प्रभावित लोगों को वापस भारत लाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि संबंधित एजेंसियों ने गृह मंत्रालय के नियमों का पालन नहीं किया और जल्दबाजी में कार्रवाई की।
अब सुप्रीम कोर्ट के रुख ने इस मामले को और अहम बना दिया है। अगली सुनवाई में केंद्र सरकार का पक्ष तय करेगा कि इन निर्वासित लोगों की भारत वापसी का रास्ता कितना आसान या कठिन होगा।
