देहरादून। उत्तराखंड में वरिष्ठ अधिकारियों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत समय से पहले सरकारी सेवा छोड़ने के मामले लगातार चर्चा में हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS) के कई अधिकारी निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु से पहले ही सेवा छोड़ने का विकल्प चुन चुके हैं या इसके लिए आवेदन कर चुके हैं। अधिकारियों के इन फैसलों ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

कई वरिष्ठ अधिकारी ले चुके हैं समय से पहले सेवानिवृत्ति

उत्तराखंड में समय से पहले सेवा छोड़ने वाले अधिकारियों में आईएएस अधिकारी उमाकांत पंवार, मनीषा पंवार, राकेश कुमार और भूपेंद्र कौर औलख के नाम शामिल रहे हैं। इसके अलावा आईपीएस अधिकारी वी. विनय कुमार और भारतीय वन सेवा के अधिकारी मनोज चंद्रन का नाम भी इस संदर्भ में सामने आया है। इन अधिकारियों के फैसलों के पीछे अलग-अलग कारण बताए गए हैं, जिनमें व्यक्तिगत परिस्थितियां और स्वास्थ्य संबंधी वजहें शामिल रही हैं।

हाल के वर्षों में वरिष्ठ अधिकारियों के वीआरएस लेने के फैसलों ने सरकारी सेवा में कार्य परिस्थितियों, व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, प्रत्येक अधिकारी के सेवा छोड़ने के पीछे एक जैसा कारण नहीं है।

बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने भी किया था आवेदन

उत्तराखंड कैडर के 2004 बैच के आईएएस अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने भी मई 2025 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। उस समय वह राज्य सरकार में सचिव स्तर के अधिकारी होने के साथ पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए वीआरएस लेने की इच्छा जताई थी।

रिपोर्टों के अनुसार, पुरुषोत्तम अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश में रहकर अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना चाहते थे। उन्होंने पहले गृह राज्य में प्रतिनियुक्ति पर जाने का प्रयास भी किया था, लेकिन यह विकल्प सफल नहीं हो सका।

वन विभाग में भी सामने आया मामला

भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी धनंजय मोहन ने भी जून 2025 में व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए समय से पहले सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना था। उस समय वह उत्तराखंड के वन विभाग में प्रमुख वन संरक्षक के पद पर कार्यरत थे। उनका कार्यकाल अगस्त 2025 तक निर्धारित था, लेकिन सरकार ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया था।

अधिकारियों के वीआरएस लेने के पीछे व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियां अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में प्रत्येक मामले को अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर देखना जरूरी है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों के समय से पहले सेवा छोड़ने की घटनाएं राज्य के प्रशासनिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण विषय बनी हुई हैं।

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