News : दीपावली का त्योहार आते ही देश में स्वदेशी और विदेशी उत्पादों को लेकर बहस तेज हो जाती है। राजनीतिक हलकों से भी अक्सर चीनी सामानों के बहिष्कार की आवाजें बुलंद होने लगती हैं।
हालाँकि, इन बातों को अपनाने की जिम्मेदारी आम जनता पर रहती है। वहीं दूसरी ओर, त्योहार के इस मौसम में उत्तराखंड परिवहन निगम द्वारा अपने परिचालकों को दी जा रही ई-टिकट मशीनों पर साफ शब्दों में ‘मेड इन चाइना’ अंकित है, जिसे लेकर अब चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इस संबंध में परिवहन निगम के महाप्रबंधक (जीएम) का तर्क है कि पेटीएम (Paytm) के जरिए ली गई ये मशीनें भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रमाणित हैं, इसलिए इनमें कोई तकनीकी या कानूनी रुकावट नहीं है। वर्तमान में उत्तराखंड रोडवेज के पास 1200 से अधिक बसें हैं। पहले जहाँ हाथ से टिकट काटे जाते थे, वहीं अब पूरी प्रक्रिया ई-टिकट मशीनों पर निर्भर है।
वर्ष 2022 में विभाग में करीब 1300 नई मशीनें शामिल की गई थीं, जिनमें से अधिकांश अब खराब हो चुकी हैं। इसी वजह से रोडवेज प्रबंधन ने नया स्टॉक लेने का फैसला किया। सर्वे के आधार पर कुल 1500 नई मशीनें किराए पर ली जा रही हैं, जिन्हें सभी डिपो में एक साथ बदला जाएगा।
इसी क्रम में काठगोदाम डिपो को 140 और हल्द्वानी डिपो को 92 नई मशीनें सौंपी जा चुकी हैं। देहरादून, दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, लुधियाना और कानपुर जैसे सभी प्रमुख मार्गों की बसों में इन्हीं का उपयोग किया जाएगा। इन मशीनों पर ‘पैक्स कंप्यूटर टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड’, ‘मेड इन चाइना’ और चीन के प्रमुख औद्योगिक शहर ‘शेनजेन’ का नाम दर्ज है।
News : प्रतिदिन ₹6.75 लाख आएगा किराए का खर्च
रोडवेज द्वारा मंगवाई गई 1500 मशीनों की आपूर्ति देहरादून, नैनीताल और टनकपुर रीजन के डिपो में शुरू हो चुकी है। प्रत्येक मशीन का दैनिक किराया ₹450 तय किया गया है, जिसके अनुसार रोडवेज को प्रतिदिन लगभग ₹6.75 लाख का भुगतान करना होगा।
परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि इन नई मशीनों से डिजिटल पेमेंट में कोई रुकावट नहीं आएगी। पुरानी मशीनों में अक्सर ऑनलाइन भुगतान अटकने की वजह से यात्रियों और परिचालकों में नोकझोंक हो जाती थी। अब जैसे ही पेमेंट रोडवेज के खाते में ट्रांसफर होगी, तुरंत टिकट प्रिंट होकर बाहर आ जाएगा।
News : ई-बसों की बैटरियां भी चीन निर्मित: जीएम
निगम की जीएम (संचालन) क्रांति सिंह के अनुसार, ई-टिकट मशीनों के लिए BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) का सर्टिफिकेशन सबसे जरूरी मानक होता है। उसी के आधार पर यह अनुबंध किया गया है और किराए की दरों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में चलने वाली ई-बसों की ज्यादातर बैटरियां और स्पेयर पार्ट्स भी चीन से आयातित होते हैं। टिकट मशीनों में भी बैटरी की गुणवत्ता सबसे अहम होती है, जिसका BIS से प्रमाणित होना ही पर्याप्त है।
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