देहरादून। उत्तराखंड में जनता की शिकायतों के निस्तारण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के सामने यह तथ्य आया कि कुल 22,246 शिकायतों को जबरन बंद कर दिया गया। इस पर सीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की संस्तुति के किसी भी शिकायत को बंद नहीं किया जाएगा।

शुक्रवार को सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि हेल्पलाइन केवल एक नंबर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और अपेक्षाओं का माध्यम है। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण तभी माना जाए जब शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो।

आंकड़ों के अनुसार, देहरादून में शहरी विकास (6,084) और पेयजल (2,980) से जुड़ी शिकायतें सबसे अधिक हैं। ऊधम सिंह नगर में राजस्व और खनन, जबकि हरिद्वार में खाद्य आपूर्ति और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतें प्रमुख हैं।

सबसे चौंकाने वाला मामला जल संस्थान का सामने आया, जहां पेयजल से जुड़ी 2,074 शिकायतों में से 2,043 (98.5%) को बिना ठोस समाधान के बंद कर दिया गया। पानी की आपूर्ति, बिजली बिल, खराब मीटर, राशन और गैस से जुड़ी समस्याओं को भी कई मामलों में नजरअंदाज किया गया।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि 6,287 शिकायतें 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं, जिनमें राजस्व, वन और लोक निर्माण विभाग शीर्ष पर हैं। वहीं, जनवरी–मार्च 2026 की तिमाही में लंबित शिकायतों में 107% और प्रक्रिया में चल रही शिकायतों में 2290% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सीएम धामी ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी हर सप्ताह और सचिव स्तर पर हर माह कम से कम दो बार समीक्षा करें। साथ ही बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि जवाबदेही तय कर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।