पिथौरागढ़। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद भारत-नेपाल सीमा पर खरीदारी को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। अब 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर नेपाल सीमा पर भंसार (कस्टम शुल्क) अनिवार्य रूप से वसूला जा रहा है। इस फैसले से सीमावर्ती भारतीय बाजारों में हड़कंप मच गया है और कारोबार प्रभावित होने लगा है।

नेपाल प्रशासन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में मुनादी कराकर लोगों को नियमों के प्रति जागरूक किया है। नागरिकों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि भारत से खरीदारी करते समय रसीद साथ रखें और सीमा पर भंसार कार्यालय में निर्धारित शुल्क जमा करें।

दरअसल, नेपाल सरकार घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह शुल्क लागू करती रही है, लेकिन उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में जरूरतों को देखते हुए पहले इसमें ढिलाई बरती जाती थी। अब नई सरकार ने नियमों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, सामान के प्रकार के आधार पर 5 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक भंसार वसूला जा रहा है, जबकि कुछ वस्तुओं पर 13 प्रतिशत तक बिक्री कर भी लागू है। दाल, चावल, चीनी, तेल और कपड़ों जैसे दैनिक उपयोग के सामान भी इसकी जद में आ गए हैं।

पिथौरागढ़ जिले से सटे झूलाघाट और धारचूला, तथा चंपावत के टनकपुर और बनबसा जैसे बाजार नेपाली ग्राहकों पर निर्भर हैं। बनबसा में रोजाना 30 से 40 लाख रुपये तक का कारोबार होता है, जो अब प्रभावित हो रहा है।

व्यापारियों के अनुसार, सख्ती के चलते साइकिल के जरिए सामान ले जाने की व्यवस्था भी सीमित हो गई है। इससे सदियों पुरानी भारत-नेपाल व्यापार परंपरा को झटका लगने की आशंका जताई जा रही है।