नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन अचानक बंद किए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के 16 जनवरी 2026 के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
याचिकाकर्ता रोशन लाल एवं अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद नियमित रूप से पेंशन मिल रही थी, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई का अवसर दिए अचानक पेंशन बंद कर दी गई। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया गया।
सुनवाई के दौरान यह भी तर्क रखा गया कि कार्य-प्रभारित कर्मचारियों की सेवा अवधि को पेंशन में शामिल करने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व निर्णयों की व्याख्या पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही, “उत्तराखंड क्वालिफाइंग सर्विस फॉर पेंशन एंड वैलिडेशन एक्ट, 2022” की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून पिछली तिथि से पेंशन लाभ समाप्त करने का प्रयास करता है, जिसे अन्य राज्यों में न्यायालयों ने सीमित किया है।
खंडपीठ ने कहा कि चूंकि कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, इसलिए मामला विचारणीय है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक 16 जनवरी 2026 के आदेश के प्रभाव पर रोक लगाते हुए स्थिति यथावत बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
