देहरादून। उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के करीब हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के साथ संपत्तियों और परिसंपत्तियों के बंटवारे का मुद्दा अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। राज्य सरकार को अब तक कई ऐसी संपत्तियों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है, जिन पर उत्तराखंड का दावा है। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कई महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां अभी भी विवाद या लंबित प्रक्रियाओं में फंसी हुई हैं।

वर्ष 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद दोनों राज्यों के बीच भूमि, भवन, परिवहन, सिंचाई, आवास विकास परिषद और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों के बंटवारे की प्रक्रिया शुरू हुई थी। वर्ष 2021 में दोनों राज्यों के बीच कई लंबित मामलों के समाधान पर सहमति बनी, लेकिन इसके बावजूद कई संपत्तियों का हस्तांतरण और उनसे मिलने वाले राजस्व का लाभ अभी तक उत्तराखंड को पूरी तरह नहीं मिल पाया है।

राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी भी पूरी नहीं हुई हैं। कुछ परिसंपत्तियों का स्वामित्व स्पष्ट न होने और संयुक्त सर्वेक्षण लंबित रहने के कारण उत्तराखंड सरकार उन संपत्तियों का उपयोग या उनसे होने वाली आय प्राप्त नहीं कर पा रही है। इससे राज्य के राजस्व पर भी असर पड़ रहा है और विकास योजनाओं के लिए संभावित संसाधनों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिसंपत्तियों के बंटवारे से जुड़े सभी लंबित मामलों का शीघ्र समाधान राज्य के हित में आवश्यक है। इससे न केवल उत्तराखंड को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि वर्षों से लंबित विवाद भी समाप्त होंगे। राज्य सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार के साथ समन्वय बनाकर शेष मामलों का समाधान कराने के प्रयास जारी हैं, ताकि उत्तराखंड अपने अधिकार की संपत्तियों और उनसे मिलने वाले लाभ का पूरा उपयोग कर सके।

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