देहरादून। राजधानी देहरादून की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। शहर में प्रारंभिक सर्वेक्षण के दौरान करीब 200 ऐतिहासिक संपत्तियों और विरासत स्थलों को चिह्नित किया गया है। अब इन स्थलों का विस्तृत दस्तावेजीकरण करने के साथ संरक्षण की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही शहर में मौजूद जर्जर और संभावित रूप से असुरक्षित भवनों का भी सर्वेक्षण और चिन्हीकरण किया जा रहा है।

जिला प्रशासन का कहना है कि देहरादून के विकास के साथ उसकी ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना जरूरी है। इसी उद्देश्य से विरासत संरक्षण से जुड़े संगठनों और विशेषज्ञों के सहयोग से शहर के पुराने भवनों, ऐतिहासिक संपत्तियों और महत्वपूर्ण स्थलों की पहचान की जा रही है। प्रारंभिक सर्वेक्षण में करीब 200 ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं, जिन्हें संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में विरासत संरक्षण से जुड़े विभिन्न संगठनों और विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में शहर की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर विस्तृत दस्तावेज तैयार करने और आगे की कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया। प्रशासन की ओर से अक्टूबर में एक विशेष कार्यशाला आयोजित करने की भी तैयारी है। इसमें विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं से सुझाव लिए जाएंगे तथा महत्वपूर्ण विरासत स्थलों को चिह्नित कर उन्हें शहर की टाउन प्लानिंग प्रक्रिया से जोड़ने पर विचार किया जाएगा।

प्रशासन ने चयनित विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। इसके लिए जिला पर्यटन विकास अधिकारी को विशेषज्ञों और कंसल्टेंट की मदद लेने के निर्देश दिए गए हैं। तैयार प्रस्तावों को आगे राज्य सरकार के समक्ष मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

वहीं, शहर में जर्जर भवनों को लेकर भी प्रशासन गंभीर है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भवन को जर्जर घोषित करने से पहले उसके सभी तकनीकी पहलुओं की जांच की जाए। नगर निगम और संबंधित निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे भवनों का सर्वेक्षण और चिन्हीकरण करने को कहा गया है।

प्रशासन का लक्ष्य देहरादून में आधुनिक विकास के साथ ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए शहर की पुरानी पहचान और महत्वपूर्ण धरोहरें संरक्षित रह सकें।