देहरादून। उत्तराखंड में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में ग्रीन एजी (जीईएफ-6) परियोजना के तहत महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जलागम विभाग द्वारा खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय “ग्रीन लैंडस्केप प्रबंधन योजना (जीएलएमपी) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं कार्यान्वयन तत्परता कार्यशाला” में विशेषज्ञों और अधिकारियों ने परियोजना के सफल संचालन की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सचिव जलागम एवं मुख्य परियोजना निदेशक दिलीप जावलकर (आईएएस) ने कहा कि ग्रीन लैंडस्केप प्रबंधन योजना का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि, जैव विविधता संरक्षण और ग्रामीण समुदायों की आजीविका को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना की सफलता के लिए प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
पाँच दिवसीय कार्यशाला के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में संस्थागत, तकनीकी एवं वित्तीय तैयारियों, पर्यावरण एवं सामाजिक प्रबंधन योजना (ईएसएमपी), मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी), निगरानी एवं प्रतिवेदन प्रणाली तथा विभिन्न परियोजना घटकों के प्रभावी कार्यान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। समूह चर्चाओं और सहभागितापूर्ण अभ्यासों के माध्यम से साझा कार्ययोजना तैयार की गई, जिससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
इस अवसर पर भारत में एफएओ के प्रतिनिधि टाकायुकी हागीवारा ने उत्तराखंड में ग्रीन एजी परियोजना के तहत किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समुदाय आधारित भागीदारी, संस्थागत क्षमता निर्माण और परिदृश्य आधारित विकास मॉडल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करेगा। उन्होंने परियोजना को सफल बनाने के लिए विभागीय समन्वय और स्थानीय सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला के दौरान परियोजना निदेशक कहकशां नसीम (आईएफएस) ने तकनीकी एवं संस्थागत तैयारियों की समीक्षा करते हुए ग्रीन लैंडस्केप प्रबंधन योजना के समयबद्ध और परिणामोन्मुख क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और परियोजना टीम को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में एफएओ के सहायक प्रतिनिधि कोंडा रेड्डी, राष्ट्रीय तकनीकी समन्वयक मनोज मिश्रा, संयुक्त निदेशक डॉ. ए.के. डिमरी, मुख्य वित्त अधिकारी दीपक चंद भट्ट, संयुक्त निदेशक अजय कुमार, राज्य तकनीकी समन्वयक हृदयेश कुमार चुनेरा, राष्ट्रीय परियोजना प्रबंधन इकाई (एनपीएमयू), राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (एसपीएमयू) तथा जलागम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रणनीति तैयार करने और विभागीय समन्वय को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया।
