उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने आईएमपीसीएल मोहान के निजीकरण को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि निजीकरण की प्रक्रिया में वन विभाग की भूमि को एक निजी कंपनी को हस्तांतरित किया जा रहा है, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। उपपा ने सरकार से निजीकरण का आदेश तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने कहा कि आईएमपीसीएल एक लाभकारी सरकारी उपक्रम है, जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सैकड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। ऐसे संस्थान को निजी हाथों में सौंपना प्रदेश के बेरोजगार युवाओं और आम जनता के हितों के खिलाफ है।

तिवारी ने बताया कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 18 जनवरी 1977 को जारी आदेश के तहत चिलकिया रेंज के कुमेरिया ब्लॉक में 46 एकड़ वन भूमि औद्योगिक संस्थान की स्थापना के लिए हस्तांतरित की गई थी। आदेश में स्पष्ट शर्त रखी गई थी कि यदि भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया तो उसे बिना किसी प्रतिकर के वन विभाग को वापस कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिस भूमि पर आईएमपीसीएल स्थित है, वह आरक्षित वन क्षेत्र का हिस्सा है और इसका हस्तांतरण किसी निजी कंपनी को नहीं किया जा सकता। उपपा का आरोप है कि सरकार ने औद्योगिक विकास निगम की भूमि और फैक्ट्री को स्काईमैप नामक निजी कंपनी को सौंप दिया है, जो नियमों के विपरीत है।

पार्टी ने मांग की है कि संबंधित 46 एकड़ वन भूमि तत्काल वन विभाग को वापस सौंपी जाए तथा आईएमपीसीएल के निजीकरण की प्रक्रिया को रद्द किया जाए। उपपा ने इस मुद्दे पर व्यापक जन आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

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