देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी राहत का फैसला लिया है। प्रदेश में संचालित 114 आरोग्य मंदिरों की सेवाएं अब बंद नहीं होंगी। शहरी विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि 1 अगस्त से इन आरोग्य मंदिरों का संचालन संबंधित नगर निकायों के माध्यम से किया जाएगा। इससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को पहले की तरह स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहेंगी और सेवाओं में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आएगा।
जानकारी के अनुसार, आरोग्य मंदिरों का संचालन अब तक ब्रेथवेट कंपनी के माध्यम से किया जा रहा था, लेकिन कंपनी के साथ हुआ अनुबंध समाप्त हो चुका है। शहरी विकास निदेशक विनोद गोस्वामी ने कंपनी को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि वह 31 जुलाई के बाद किसी भी आरोग्य मंदिर का संचालन नहीं कर सकेगी। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने इन केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी नगर निकायों को सौंपी है। इसके लिए 79 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया गया है।
सरकार ने संचालन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) को कार्यदायी संस्था नामित किया है। फिलहाल शहरी विकास निदेशालय और ब्रिडकुल के बीच एमओयू की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके पूरा होने तक संबंधित नगर निकाय अस्थायी रूप से आरोग्य मंदिरों का संचालन करते रहेंगे ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।
शहरी विकास विभाग का कहना है कि प्रदेश का कोई भी आरोग्य मंदिर बंद नहीं किया जाएगा। नगर निकाय आवश्यकता पड़ने पर किसी संस्था का चयन कर संचालन की व्यवस्था कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों तक सस्ती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर पहुंचाना है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि संचालन व्यवस्था में बदलाव का असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर नहीं पड़ेगा और सभी आरोग्य मंदिर पहले की तरह कार्य करते रहेंगे।
