देहरादून। लगातार बढ़ती बिजली मांग और उत्पादन में आ रही चुनौतियों के बीच उत्तराखंड को आने वाले समय में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ने 1471 मेगावाट क्षमता की छह नई बिजली परियोजनाओं को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। इनमें जलविद्युत परियोजनाओं के साथ पंप स्टोरेज प्लांट और पहली बार चीला पावर हाउस में 90 मेगावाट क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी शामिल है। इन परियोजनाओं पर नए साल से काम तेजी पकड़ने की उम्मीद है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुमान के अनुसार राज्य में बिजली की मांग आने वाले वर्षों में लगातार बढ़ेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड की पीक बिजली मांग करीब 2883 मेगावाट रहने का अनुमान है। यह मांग 2030-31 तक बढ़कर 3332 मेगावाट और 2035-36 तक 4113 मेगावाट तक पहुंच सकती है। इसी तरह राज्य की वार्षिक ऊर्जा आवश्यकता भी 2026-27 के 1,755.7 करोड़ यूनिट से बढ़कर 2035-36 तक 2,635.2 करोड़ यूनिट होने का अनुमान है।
यूजेवीएनएल की छह प्रस्तावित परियोजनाओं में त्यूनी-प्लासू की क्षमता 80 मेगावाट है, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुका है। 81 मेगावाट की आराकोट-त्यूनी परियोजना की डीपीआर मंजूर हो चुकी है। वहीं इच्छाड़ी पंप स्टोरेज प्लांट की क्षमता 600 मेगावाट और सौंग पंप स्टोरेज प्लांट की क्षमता 500 मेगावाट है। 120 मेगावाट के सेला उर्थिंग हाइड्रो प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके अलावा चीला में 90 मेगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुका है।
इसके अलावा लखवाड़-व्यासी परियोजना से उत्तराखंड को 420 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है, जबकि किशाऊ परियोजना से राज्य के हिस्से में 211 मेगावाट बिजली आएगी। व्यासी परियोजना की 120 मेगावाट बिजली का उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है।
यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक एके सिंह के अनुसार इन परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। निगम का लक्ष्य अगले पांच से सात वर्षों में राज्य में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
