देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत संचालित व्यावसायिक (वोकेशनल) पाठ्यक्रम अब प्रदेश के 200 सरकारी स्कूलों में बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नई कार्यदायी संस्था का चयन होने तक पूर्व में कार्यरत संस्था के माध्यम से ही इन पाठ्यक्रमों का संचालन जारी रखा जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

दरअसल, व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम के संचालन के लिए अनुबंधित कंपनी का करार समाप्त होने के बाद एक अप्रैल से प्रदेश के लगभग 200 सरकारी विद्यालयों में कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन सहित विभिन्न ट्रेडों की पढ़ाई प्रभावित हो गई थी। इससे विशेष रूप से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस स्थिति को देखते हुए शिक्षा मंत्री ने विभागीय समीक्षा बैठक में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नई संस्था के चयन की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी विद्यालय में व्यावसायिक शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्वीकृत बजट का समयबद्ध और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। साथ ही विद्यालयों में संचालित विभिन्न शैक्षिक योजनाओं की नियमित निगरानी कर उनकी गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल प्रदान करना है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। कृषि, आईटी, पर्यटन और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर छात्रों को रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन पाठ्यक्रमों के निर्बाध संचालन से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी भी समय पर पूरी हो सकेगी। विभाग ने नई संस्था के चयन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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