देहरादून। धामी सरकार में पंचायतीराज मंत्री बनाए गए मदन कौशिक के सामने ‘छोटी सरकार’ यानी पंचायतों को सशक्त बनाने की बड़ी चुनौती है। शहरी विकास मंत्री के रूप में पूर्व में कार्य कर चुके कौशिक को इस बार ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में उनसे अपेक्षा है कि वे पंचायतों को अधिक अधिकार दिलाकर विकास कार्यों में तेजी लाएं।

राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी पंचायतों को 73वें संविधान संशोधन के तहत मिलने वाले 29 विषय पूरी तरह हस्तांतरित नहीं हो पाए हैं। इसके चलते पंचायतें आज भी वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रही हैं। सरकार द्वारा गठित हाईपावर कमेटी अपनी सिफारिशें दे चुकी है, लेकिन इनका क्रियान्वयन अब भी लंबित है।

प्रदेश में बुनियादी ढांचे की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। करीब 850 ग्राम पंचायतों के पास अपने पंचायत भवन नहीं हैं, जिससे स्थानीय प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, पिछले दो वर्षों से पंचायत भवन निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि खर्च नहीं हो पाई है, क्योंकि 20 लाख रुपये प्रति भवन की प्रस्तावित राशि को कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिल सकी है।

इसके अलावा, राज्य में पलायन एक गंभीर समस्या बन चुका है। एक हजार से अधिक गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। इन गांवों में दोबारा आबादी बसाना और विकास की धारा से जोड़ना भी मंत्री के सामने बड़ी चुनौती होगी।

शिक्षा विभाग के 2200 बंद हो चुके विद्यालयों का पंचायत भवन के रूप में उपयोग करने का प्रस्ताव भी अब तक अधूरा है। यदि इन भवनों को पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए तो इससे आधारभूत ढांचे की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।

ऐसे में मदन कौशिक के सामने सीमित समय में इन सभी चुनौतियों का समाधान निकालकर पंचायतों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है।