नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को उत्पाद शुल्क नीति मामले में विशेष अदालत द्वारा बरी किए जाने के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। एजेंसी ने विशेष अदालत के फैसले को “स्पष्ट रूप से अवैध और मनमाना” बताते हुए तत्काल पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है। इस मामले की सुनवाई 9 मार्च को निर्धारित है।
सीबीआई ने अपनी 974 पृष्ठों की याचिका में कहा है कि विशेष अदालत का आदेश अभियोजन पक्ष के मामले के चुनिंदा पठन पर आधारित है। एजेंसी का तर्क है कि आरोपियों की संलिप्तता दर्शाने वाली महत्वपूर्ण सामग्री को नजरअंदाज किया गया और षड्यंत्र के विभिन्न पहलुओं का समग्र मूल्यांकन करने के बजाय उन्हें अलग-अलग परखा गया। सीबीआई के अनुसार, विशेष न्यायाधीश ने प्रभावी रूप से एक “मिनी-ट्रायल” कर दिया, जो आरोप तय किए जाने के चरण में विधिसम्मत नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है।
गौरतलब है कि विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तथा 21 अन्य आरोपियों को सीबीआई की आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने से इनकार करते हुए बरी कर दिया था। इन आरोपियों में के. कविता भी शामिल हैं। अदालत ने जांच में कथित खामियों को लेकर सीबीआई को फटकार लगाई थी और कहा था कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, जबकि सिसोदिया व अन्य के विरुद्ध प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता।
सीबीआई ने अपनी याचिका में कहा है कि विशेष न्यायाधीश ने तथ्यों की गलत व्याख्या की और जांच एजेंसी व जांच अधिकारी के खिलाफ अनुचित टिप्पणियां कीं। एजेंसी का कहना है कि आदेश में स्पष्ट त्रुटियां हैं और इसे निरस्त किया जाना आवश्यक है। अब इस बहुचर्चित मामले पर अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय की सुनवाई के बाद सामने आएगा।
