नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार किए जाने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि संविधान दमनकारी नीतियों के खिलाफ लड़ने वालों की रक्षा करता है। शीर्ष अदालत ने 1 मई को खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर की थी।

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित टिप्पणी से जुड़ी प्राथमिकी से संबंधित है। इस फैसले के बाद दिल्ली हवाई अड्डे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खेड़ा का गर्मजोशी से स्वागत किया।

मीडिया से बातचीत में खेड़ा ने कहा कि उन्हें मिली राहत बी.आर. अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के कारण ही संभव हो सकी है। उन्होंने कहा, “संविधान हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, खासकर उन लोगों की जो सत्ता के खिलाफ आवाज उठाते हैं।”

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने गौहाटी उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें खेड़ा को गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा देने से इनकार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और ईमानदारी से होनी चाहिए, लेकिन अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता को हल्के में खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर तुरंत रिहा किया जाए।

इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है।