उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के दौरान स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर हजारों टन कूड़ा जमा होने से प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। जानकीचट्टी से शुरू होने वाली यात्रा के शुरुआती हिस्से में ही श्रद्धालुओं को कूड़े से ढकी पहाड़ियां दिखाई दे रही हैं, जिससे न केवल प्राकृतिक सौंदर्य प्रभावित हो रहा है बल्कि यात्रियों का अनुभव भी खराब हो रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिला पंचायत कूड़े के उचित निस्तारण के बजाय उसे सीधे पहाड़ी ढलानों पर फेंक रही है। इसका असर यह हुआ है कि आसपास के लोग भी वहीं कूड़ा डालने लगे हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। यह स्थिति हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता के लिए खतरा बन रही है और पवित्र यमुना नदी के प्रदूषण का कारण भी बन रही है।

विरोधाभास यह है कि प्रशासन स्वच्छता के नाम पर शुल्क तो वसूल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था नदारद है। पालीगाड़ में प्रत्येक वाहन से 100 रुपये पर्यावरण शुल्क लिया जा रहा है, वहीं पैदल मार्ग पर मजदूरों और घोड़ा-खच्चर संचालकों से भी शुल्क वसूला जा रहा है। इसके बावजूद मार्ग पर कूड़े के ढेर साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं।

यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन को तत्काल प्रभाव से कूड़ा प्रबंधन की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि धाम की पवित्रता और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।