नैनीताल। नेशनल हाई कोर्ट में सोमवार को उन कैदियों की रिहाई के मामले पर सुनवाई हुई, जिन्होंने आजीवन कारावास की सजा पूरी कर ली है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक जेलों से रिहा नहीं किए गए हैं। मामले की सुनवाई न्यायाधीश रविंद्र मैथानी और जस्टिस सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने की।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा कि ऐसे कैदियों की रिहाई के लिए क्या नीति बनाई गई है। कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी।
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पूर्व आदेशों के अनुपालन में कई कैदियों को रिहा किया जा चुका है। हालांकि, कुछ गंभीर अपराधों में शामिल कैदियों को अब तक नहीं छोड़ा गया है। सरकार ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में रिहाई के लिए राज्य स्तर पर विशेष अनुमति आवश्यक है।
वहीं, कैदियों की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया कि उनकी सजा पूरी हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जेल में रखा गया है। याचिकाकर्ताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना तथा संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया।
गौरतलब है कि पूर्व में हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जेलों का निरीक्षण किया था। जांच में 167 ऐसे कैदी मिले थे, जिनकी सजा पूरी हो चुकी थी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया लंबित होने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी थी।
