देहरादून। उत्तराखंड की आयुध निर्माण इकाइयों में अब भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक नाइट विजन कैमरों का निर्माण किया जा रहा है। इन कैमरों का उपयोग सैन्य हथियारों और रक्षा प्रणालियों में किया जाएगा, जिससे रात के समय भी सैनिकों की निगरानी और लक्ष्य भेदन क्षमता पहले से अधिक प्रभावी हो सकेगी। यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, देहरादून स्थित आयुध निर्माण इकाइयों में आधुनिक तकनीक से लैस नाइट विजन उपकरण तैयार किए जा रहे हैं। इन कैमरों को सेना की आवश्यकताओं और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, ताकि सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात जवानों को बेहतर तकनीकी सहायता मिल सके। इन उपकरणों के उपयोग से कम रोशनी और रात के अंधेरे में भी लक्ष्य की सटीक पहचान संभव होगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का स्वदेशी निर्माण न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को भी नई मजबूती देगा। इससे उत्तराखंड की आयुध फैक्ट्रियां रक्षा निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रही हैं। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी विशेषज्ञता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य आधुनिक रक्षा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाकर भारतीय सेना को अत्याधुनिक तकनीक से सशक्त बनाना है।
