हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में पुलिस विभाग के भीतर महिला दरोगा के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद अब आरोपी एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) सिपाही के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिसकर्मियों के बीच हुए इस विवाद ने विभाग में अनुशासन और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने विभागीय जांच भी शुरू कराई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, घटना हल्द्वानी कोतवाली परिसर में महिला हेल्प डेस्क के पास हुई। यहां तैनात महिला दरोगा और एसओजी में कार्यरत सिपाही के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर सिपाही पर महिला दरोगा को थप्पड़ मारने का आरोप है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद के दौरान सिपाही द्वारा महिला दरोगा पर पिस्टल तानने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, इस संबंध में सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामला पुलिस के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा
घटना के बाद मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया। रिपोर्टों के अनुसार, महिला दरोगा ने उच्चाधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी थी। शुरुआती स्तर पर मामला सामने आने के बाद आरोपी सिपाही को दूसरे सर्किल में भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई थी। बाद में प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने इसकी विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया।
हल्द्वानी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी ने मामले की जांच महिला क्षेत्राधिकारी (सीओ) को सौंपी है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में विवाद के कारणों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी विवाद होने की बात आई सामने
मामले की जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि महिला दरोगा और संबंधित सिपाही के बीच पहले भी विवाद होने की बात कही जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दोनों के बीच पूर्व में कहासुनी और मारपीट की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। जांच अधिकारी इन पहलुओं की भी पड़ताल कर सकते हैं, ताकि विवाद की पृष्ठभूमि स्पष्ट हो सके।
पुलिस अधिकारियों ने विभाग में अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेने की बात कही है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर है। इस प्रकरण में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी।
