देहरादून। प्रदेश में सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के संचालन और शिक्षक तैनाती व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार इन विद्यालयों के लिए अलग नियमावली तैयार कर रही है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि नई व्यवस्था से शिक्षकों के तबादलों और सेवाओं के निर्धारण में स्पष्टता आएगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2020-21 में उत्तराखंड बोर्ड से संचालित कई राजकीय इंटर कॉलेजों को सीबीएसई से संबद्ध कर अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में परिवर्तित किया गया था। इन विद्यालयों के लिए शिक्षकों का चयन स्क्रीनिंग परीक्षा के माध्यम से किया गया और उनकी तैनाती पांच वर्षों के लिए निर्धारित की गई थी।
मौजूदा व्यवस्था के तहत दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों की एक वर्ष की सेवा को दो वर्ष के बराबर माना जाता है, जबकि सुगम क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों की सेवाओं को भी कुछ मामलों में दुर्गम सेवा में जोड़ा जा रहा है। इसी दोहरी व्यवस्था को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ा है। पहले से तैनात शिक्षकों और चयनित होकर आए शिक्षकों के बीच सेवा गणना को लेकर असमानता की स्थिति बन गई है।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि नई नियमावली में इस विसंगति को दूर किया जाएगा। सुगम और दुर्गम सेवाओं के निर्धारण में बदलाव किया जाएगा, जिससे सभी शिक्षकों के लिए समान और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। साथ ही अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी कुछ अतिरिक्त अधिकार दिए जाएंगे, ताकि विद्यालयों का संचालन और अधिक प्रभावी बन सके।
सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल शिक्षकों की समस्याएं हल होंगी, बल्कि विद्यालयों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
