देहरादून। उत्तराखंड के माध्यमिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित एलटी (प्रशिक्षित स्नातक) शिक्षकों की वरिष्ठता का मामला अब सुलझने की दिशा में बढ़ गया है। करीब दो दशक बाद विभाग ने एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस निर्णय से वर्ष 1992 से 1996 के बीच नियुक्त आयोग चयनित शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से अपने वैधानिक वरिष्ठता अधिकार की मांग कर रहे थे।
शिक्षा विभाग ने 9 जुलाई को गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अपर शिक्षा निदेशकों को निर्देश जारी करते हुए संबंधित शिक्षकों की अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार करने को कहा है। यह कार्रवाई शासन के 25 जनवरी 2024 के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। वरिष्ठता विवाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था और अवमानना याचिका के बाद विभाग ने इस दिशा में कदम उठाया है।
दरअसल, वर्ष 2005 में सीटी संवर्ग के शिक्षकों को पांच वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद एलटी संवर्ग में समायोजित कर वरिष्ठता का लाभ दे दिया गया था। जबकि नियमों के अनुसार यह लाभ 10 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद मिलना चाहिए था। इस व्यवस्था के कारण आयोग से चयनित एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हुई और अनेक शिक्षक वर्षों तक पदोन्नति से वंचित रहे।
अब शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सीटी संवर्ग के शिक्षकों को नियुक्ति के 10 वर्ष पूरे होने के बाद ही एलटी संवर्ग में वरिष्ठता का लाभ मिलेगा। साथ ही आयोग से चयनित एलटी शिक्षकों की वैधानिक वरिष्ठता बहाल की जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे वरिष्ठता सूची में पारदर्शिता आएगी और पदोन्नति से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान हो सकेगा।
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। उनका कहना है कि इस निर्णय से वर्षों से प्रभावित शिक्षकों को उनका अधिकार मिलेगा और विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया भी तेज होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित वरिष्ठता सूची जारी की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और पदोन्नतियां की जाएंगी।
