देहरादून। उत्तराखंड सरकार प्रदेश के परिवारों को डिजिटल पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि परिवार योजना के तहत परिवार पहचान पत्र और डिजिटल पोर्टल की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक परिवार का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना और केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाना है।
योजना के तहत प्रदेश के प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट पहचान संख्या यानी यूनिक फैमिली आईडी दी जाएगी। इसके माध्यम से परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यक जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इससे अलग-अलग सरकारी विभागों में परिवारों के रिकॉर्ड को जोड़ने और योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करने में आसानी होगी।
सरकार का मानना है कि अभी विभिन्न विभाग अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस तैयार करते हैं। इसके कारण कई बार एक ही व्यक्ति या परिवार का विवरण अलग-अलग जगह दर्ज होता है। साथ ही पात्र लाभार्थियों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन में भी समय लगता है। देवभूमि परिवार योजना के लागू होने से इन समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से परिवारों को यह जानकारी भी मिल सकेगी कि वे किन सरकारी योजनाओं के लिए पात्र हैं और किन योजनाओं का लाभ उन्हें पहले से मिल रहा है। इससे आवेदन प्रक्रिया आसान होने के साथ ही सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम होगी।
योजना में परिवार की पहचान को आधार बनाकर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया है। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण, आवास और अन्य जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य सुशासन को मजबूत करना और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। सरकार को उम्मीद है कि एकीकृत डिजिटल डेटाबेस से अपात्र और फर्जी लाभार्थियों की पहचान करना भी आसान होगा।
देवभूमि परिवार योजना को प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
