नैनीताल। उत्तराखंड में उच्च शिक्षण संस्थानों को पाठ्यक्रमों की संबद्धता देने और इसके लिए निर्धारित सिक्योरिटी डिपॉजिट की मांग को लेकर विवाद एक बार फिर उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। हल्द्वानी स्थित एक शिक्षण संस्थान से जुड़े बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रमों की संबद्धता तथा सिक्योरिटी राशि जमा कराने के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले ने प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीच संबद्धता प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।
मामले का मुख्य मुद्दा बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए संबद्धता प्राप्त करने तथा इसके एवज में मांगी जा रही सिक्योरिटी राशि से जुड़ा है। संस्थान की ओर से विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित सिक्योरिटी डिपॉजिट की मांग को लेकर आपत्ति जताई गई है। संस्थान का पक्ष है कि संबद्धता की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। वहीं, विश्वविद्यालय की ओर से संबद्धता से जुड़े नियमों और निर्धारित शर्तों के आधार पर सिक्योरिटी राशि की मांग की जाती है।
इस तरह के विवादों में विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों के बीच सिक्योरिटी डिपॉजिट की अनिवार्यता, उसकी निर्धारित रकम और नियामक संस्थाओं के नियमों को लेकर कानूनी सवाल खड़े होते रहे हैं। निजी कॉलेजों का तर्क रहता है कि संबद्धता के नाम पर निर्धारित नियमों से अधिक आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। वहीं विश्वविद्यालयों का कहना है कि शैक्षणिक गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वित्तीय शर्तें लागू की जाती हैं।
हाईकोर्ट में हुई इस सुनवाई के बाद अब मामले में न्यायालय की आगे की कार्यवाही और संभावित आदेश पर नजर रहेगी। इस विवाद का असर केवल संबंधित संस्थान तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि प्रदेश के अन्य निजी कॉलेजों में संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की संबद्धता प्रक्रिया के लिए भी यह महत्वपूर्ण हो सकता है।
