देहरादून। उत्तराखंड में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं के संचालन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार अब इसके लिए स्पष्ट नियम तैयार करेगी। सरकार ने केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं की निगरानी और बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती की तैयारी भी शुरू कर दी है।
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं को प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने दोनों परियोजनाओं को परवतमाला परियोजना के तहत मंजूरी दी है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक करीब 12.9 किलोमीटर और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक करीब 12.4 किलोमीटर लंबा रोपवे प्रस्तावित है। दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब 6,811 करोड़ रुपये है।
राज्य सरकार का फोकस अब इन परियोजनाओं के निर्माण के साथ-साथ इनके संचालन की व्यवस्था को मजबूत करने पर है। रोपवे शुरू होने के बाद यात्रियों की सुरक्षा, संचालन की निगरानी, आपात स्थिति में बचाव व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए नियम जरूरी होंगे।
सरकार की ओर से दोनों प्रमुख परियोजनाओं के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए जाने से संबंधित प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी परियोजनाओं से जुड़े विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने की होगी।
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में रोपवे परियोजनाएं यात्रियों के लिए काफी सुविधाजनक साबित हो सकती हैं। खासतौर पर बुजुर्गों और शारीरिक रूप से असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए इससे यात्रा आसान होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
अब रोपवे संचालन के नियम तैयार होने और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन को गति मिलने की उम्मीद है।
