नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने राजधानी की जल, सीवर, कर वसूली, बाल कल्याण और उच्च शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट में यमुना की बदहाल स्थिति से लेकर सरकारी विश्वविद्यालयों की कमजोर हालत तक कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट पर चर्चा के बाद सरकार ने सुधार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना पर काम शुरू करने का दावा किया है।
कैग रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन 200 एमजीडी से अधिक बिना ट्रीटमेंट का सीवेज सीधे यमुना में गिर रहा है, जिससे नदी की हालत लगातार बिगड़ रही है। वहीं 1000 से अधिक कॉलोनियां अब भी सीवर नेटवर्क से बाहर हैं। जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सदन में स्वीकार किया कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत कमियों के कारण हालात गंभीर हुए हैं।
मंत्री ने बताया कि दिल्ली को करीब 1200 एमजीडी पानी की जरूरत है, जबकि वर्तमान में केवल 1000 एमजीडी की आपूर्ति हो पा रही है। इसके साथ ही नॉन-रेवेन्यू वाटर लॉस 45 से 53 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो सिस्टम की बड़ी कमजोरी को दर्शाता है। राजधानी में करीब 30 लाख घरों में नियमित जल कनेक्शन नहीं होने से समस्या और गंभीर हो गई है।
यमुना की सफाई और सीवेज प्रबंधन को लेकर सरकार ने बड़ा रोडमैप पेश किया है। मंत्री के अनुसार 35 नए और अपग्रेडेड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जाएंगे, जिससे ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाकर 1500 एमजीडी की जाएगी। नजफगढ़ नाले सहित बड़े नालों के इन-सीटू ट्रीटमेंट की योजना भी तैयार की गई है। उन्होंने दावा किया कि अगले दो से ढाई वर्षों में ट्रीटमेंट क्षमता जरूरत से अधिक हो जाएगी।
सीवर नेटवर्क विस्तार को लेकर भी सरकार ने बड़ा लक्ष्य रखा है। वर्तमान में करीब 20 लाख घर सीवर नेटवर्क से बाहर हैं। सरकार 1799 अनधिकृत कॉलोनियों तक सीवर लाइन पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। पिछले एक वर्ष में 180 किलोमीटर से अधिक नई सीवर लाइन बिछाई गई है और 400 से अधिक कॉलोनियों में काम जारी है। सेप्टिक टैंक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड डिजिटल बुकिंग और अपने टैंकर सिस्टम की नई व्यवस्था लागू करेगा।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि कैग रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड को 4988 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में जल नीति की कमी, परियोजनाओं में देरी और भूजल प्रबंधन की कमजोरियों को भी गंभीर मुद्दा बताया गया है। अध्यक्ष ने संबंधित विभागों को तय समय के भीतर एक्शन टेकन नोट (एटीएन) जमा करने के निर्देश दिए हैं।
उधर, दिल्ली के सरकारी विश्वविद्यालयों की स्थिति पर भी कैग रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विश्वविद्यालयों में छात्र संख्या बेहद कम है और तीन विश्वविद्यालयों में कुल मिलाकर केवल तीन छात्र नामांकित हैं। पिछले वर्ष यह संख्या केवल 20 थी। दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी अब भी एक स्कूल भवन में संचालित हो रही है, जबकि दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सीमित संसाधनों में चल रही है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि रिपोर्ट ने वित्तीय कुप्रबंधन, मानव संसाधन की कमी और अकादमिक स्तर पर कमजोरियों को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि 16 वर्षों तक एडमिशन सिस्टम पारदर्शी तरीके से संचालित नहीं हुआ, न स्पष्ट प्रवेश नीति थी और न माइग्रेशन का प्रभावी तंत्र। कई वर्षों तक विश्वविद्यालयों के ऑडिटेड अकाउंट्स सदन में पेश नहीं किए गए।
रिपोर्ट में फंड के गलत इस्तेमाल, मनमानी नियुक्तियों और बिना मान्यता वाले कोर्स चलाने जैसे मामलों का भी जिक्र किया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार अब सुधार की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच 3014 ईडब्ल्यूएस छात्रों को 44 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई है, जबकि कैंपस टू मार्केट योजना के तहत 100 स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान की गई है।
सदन में कैग की अन्य रिपोर्टों पर चर्चा के दौरान जीएसटी, वैट, स्टाम्प शुल्क, मोटर वाहन कर और आबकारी कर की वसूली में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, सूचना एवं प्रचार, राजस्व और शहरी विकास विभागों में भी कमियां पाई गई हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि 15 वर्षों बाद लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट सदन में आई है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार द्वारा कैग रिपोर्टें सदन में पेश नहीं किए जाने के कारण पीएसी लंबे समय तक निष्क्रिय रही। अब समिति को पुनः सक्रिय कर जवाबदेही तय की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी विभागों को जल्द से जल्द अपनी कार्रवाई रिपोर्ट (एटीएन) प्रस्तुत करनी होगी, ताकि कमियों की गहन जांच कर जिम्मेदारी तय की जा सके और सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
