देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के पांच जिलों के सरकारी विद्यालयों में अब मिड-डे मील की विशेष जांच कराई जाएगी। यह निर्णय हरिद्वार के मदरसों में बड़ी संख्या में छात्रों के फर्जी नामांकन का मामला सामने आने के बाद लिया गया है, ताकि सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन की पुष्टि की जा सके।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा महानिदेशालय और सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिए हैं कि चयनित जिलों के स्कूलों में मिड-डे मील योजना का गहन निरीक्षण किया जाए। जांच के दौरान विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति, भोजन की गुणवत्ता, खाद्यान्न के उपयोग, रिकॉर्ड का मिलान और योजना के संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।
विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल पात्र विद्यार्थियों तक ही पहुंचे और कहीं भी अनियमितता या सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न हो। जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि नियमित निरीक्षण से मिड-डे मील योजना अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं में जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
