चमोली। विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में गुरुवार रात अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। टनल के भीतर काम कर रहे कई मजदूर मलबे और पानी के बीच फंस गए। हादसे में करीब नौ मजदूरों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि कई अन्य की तलाश जारी है। राहत और बचाव टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान में जुटी हैं।
यह हादसा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसी परियोजना की करीब तीन किलोमीटर लंबी निर्माणाधीन सुरंग में पिछले आठ महीनों में यह दूसरा बड़ा हादसा है। दिसंबर 2025 में भी टनल के अंदर दो लोको ट्रॉलियों के आपस में टकराने से कई मजदूर घायल हुए थे। इसके बाद अब पानी और मलबा आने की घटना ने परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की क्षमता 444 मेगावाट है और इसका करीब 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। ऐसे में लगातार दूसरी दुर्घटना होने से टनल के भीतर सुरक्षा मानकों, निगरानी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि दिसंबर में हुए हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था में जिन सुधारों की जरूरत थी, उन्हें कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया गया।
परियोजना का संचालन कर रही टीएचडीसी ने मौजूदा हादसे को भूगर्भीय आपदा बताया है। प्रबंधन के अनुसार अचानक पानी और मलबा आने के कारण यह स्थिति बनी। हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों को लगाया गया है। वहीं, घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
