देहरादून। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कार्यालय में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए उपस्थिति रजिस्टर के पन्ने गायब करने के आरोप में आयोग के पूर्व सहायक नितिन राणा के खिलाफ प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल की ओर से दी गई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2022-23 के उपस्थिति रजिस्टर में मई और जून माह की उपस्थिति को लेकर गड़बड़ी सामने आई थी। रजिस्टर के पेज संख्या छह और सात पर नितिन राणा की उपस्थिति गलत दर्ज पाई गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित अवधि को अवैतनिक अवकाश मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने का आदेश दर्ज किया था।
आरोप है कि कार्रवाई से बचने के लिए नितिन राणा ने पहले आदेश के ऊपर एक पर्ची चिपकाकर उसे ढकने का प्रयास किया। इसके बाद उपस्थिति रजिस्टर के संबंधित पन्नों को ही फाड़कर गायब कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद आयोग ने उन्हें उपनल को वापस भेज दिया। आयोग के अनुसार, इसके बावजूद उन्होंने अपना कार्यभार किसी अन्य कर्मचारी को नहीं सौंपा, जिससे कार्यालय के कामकाज में भी परेशानी हुई।
अलमारी की तलाशी में मिले गायब पन्ने
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब 18 जून 2026 को नितिन राणा की कार्यालय स्थित अलमारी का ताला खुलवाया गया। तलाशी के दौरान उपस्थिति रजिस्टर से गायब किए गए दोनों पन्ने उनकी पितृत्व अवकाश से संबंधित पत्रावली के भीतर छिपे हुए मिले। इसके बाद आयोग की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई।
नितिन राणा वर्ष 2019 से उपनल के माध्यम से आयोग में संविदा पर तैनात थे। प्रेमनगर थाना पुलिस के अनुसार, आयोग की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की परिस्थितियों और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
