पुलिस की जांच-पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी फर्जी फर्म तैयार करवाकर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर कमीशन के लालच में इन खातों को आगे साइबर जालसाजों तक पहुंचा दिया करते थे। इन बैंक खातों में 30 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेन-देन (क्रेडिट ट्रांजेक्शन) का पता चला है। देश के विभिन्न राज्यों से इस गिरोह से जुड़े ऑनलाइन फ्रॉड की 27 शिकायतें दर्ज हैं।
News : आरोपियों के पास से बरामद सामान
पुलिस के मुताबिक, मूल रूप से इलाहाबाद की रहने वाली और डीयू के रामजस कॉलेज की छात्रा फातिमा ने नॉर्थ साइबर थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्हें इंस्टाग्राम पर ‘काव्य_कुर्ती_हब’ हैंडल से कुर्ती का एक विज्ञापन दिखा था। व्हाट्सएप पर 799 रुपये का आर्डर तय होने के बाद उन्होंने 400 रुपये अग्रिम (एडवांस) भुगतान किए।
News : 200 मोबाइल नंबरों की जांच से खुला राज
इस कड़ी में 16 अक्टूबर को हुई छापेमारी के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 21 अक्टूबर को कानपुर से गिरोह के सातवें आरोपी उदित प्रताप सिंह भदौरिया को धर दबोचा गया।
News : हर महीने मिलते थे 25 हजार रुपये
एमबीए की पढ़ाई कर चुका आरोपी गौरव पांडे इन खातों को कमीशन पर आगे सप्लाई करने वाले इस सिंडिकेट का एक अहम मोहरा था। फिलहाल, पुलिस बरामद किए गए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और कागजातों की गहराई से छानबीन कर रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
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