देहरादून। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित और निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री राहत योजना का उत्तराखंड में अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। राज्य में योजना लागू होने के बाद अब तक केवल सात घायल ही इसका लाभ उठा सके हैं, जबकि इसी अवधि में सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए हैं।

केंद्र सरकार की यह योजना फरवरी 2026 में शुरू की गई थी। इसके तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का नामित अस्पताल में सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक का निशुल्क इलाज कराया जाता है। यदि घायल को पहले किसी गैर-नामित अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, तो वहां प्राथमिक उपचार और स्थिति स्थिर करने के बाद उसे योजना से जुड़े अस्पताल में स्थानांतरित करने का प्रावधान है। साथ ही, पुलिस द्वारा दुर्घटना की पुष्टि और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना भी आवश्यक होता है।

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मार्च से जून 2026 के बीच उत्तराखंड में 514 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 406 लोग घायल हुए, जबकि 281 लोगों की मौत हो गई। इसके बावजूद योजना के तहत केवल 17 मामलों में ही प्रक्रिया शुरू हो सकी। इनमें सात मामलों में पुलिस स्तर पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी, जबकि तीन मामले योजना की पात्रता में शामिल नहीं हो पाए। अंततः केवल सात घायलों का देहरादून, ऊधम सिंह नगर और चमोली के अस्पतालों में इस योजना के तहत निशुल्क उपचार हो सका।

परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जल्द ही पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में योजना के संचालन में आ रही व्यावहारिक समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि अधिक से अधिक सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इस योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि कहीं प्रक्रिया संबंधी कमियां हैं तो उन्हें दूर कर योजना को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

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