देहरादून। हरिद्वार शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में हरिद्वार बाईपास-2 परियोजना ने अहम कदम बढ़ाया है। परियोजना का अलाइनमेंट अंतिम रूप से तय कर दिया गया है। प्रस्तावित बाईपास राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिसके निर्माण के दौरान वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

प्रस्तावित बाईपास के निर्माण से हरिद्वार शहर के भीतर भारी वाहनों और लंबी दूरी के यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे दिल्ली, देहरादून और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर आने-जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जिससे शहर में लगने वाले जाम से राहत मिल सकेगी। यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ यात्रा को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

चूंकि प्रस्तावित मार्ग राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरेगा, इसलिए परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। निर्माण के दौरान आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां ली जाएंगी और वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए आधुनिक संरचनाएं और संरक्षण उपाय अपनाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

परियोजना का अलाइनमेंट तय होने के बाद अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं पर काम तेज किया जाएगा। इसके बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई शुरू होगी। प्रशासन का मानना है कि हरिद्वार बाईपास-2 के तैयार होने से यातायात व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा तथा चारधाम यात्रा सहित अन्य मार्गों पर आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुगम हो सकेगा।

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