वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में नए कुलपति के तौर पर डॉ. तृप्ता ठाकुर की नियुक्ति कर दी गई है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति गुरमीत सिंह ने विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 9 के तहत गठित चयन समिति की सिफारिशों पर यह नियुक्ति की। डॉ. ठाकुर वर्तमान में राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण प्रतिष्ठान (एनपीटीआई), विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार की महानिदेशक हैं। उनकी नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से तीन वर्षों के लिए अथवा अगले आदेश तक प्रभावी होगी।

समय-समय पर पारदर्शिता की मांग

डॉ. ठाकुर को ऐसे समय विश्वविद्यालय की कमान सौंपी गई है, जब पिछले कई वर्षों से यहां अकादमिक और प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रही हैं। विश्वविद्यालय में अनियमित भर्तियों, वित्तीय अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली की खामियों को लेकर कई बार जांचें बैठ चुकी हैं। छात्रों और कर्मचारियों ने भी समय-समय पर पारदर्शिता की मांग उठाई है।

संगठनों ने कई बार धरना प्रदर्शन किए

गौरतलब है कि वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में सॉफ्टवेयर डेवलप करने के नाम पर करोड़ों का घोटाला सामने आया है। आरोप है कि विवि के कुछ अफसरों ने लखनऊ की एक कंपनी से साठगांठ कर सरकार को दो करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया है। मामले की प्राथमिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। तकनीकी शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा ने उच्चस्तरीय तकनीकी समिति गठित कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अफसरों पर कठोर कार्रवाई के साथ रिकवरी की भी संस्तुति की है।

इन घपलों को लेकर राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने कई बार धरना प्रदर्शन किए। नई कुलपति से उम्मीद की जा रही है कि वे न केवल शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाएंगी, बल्कि संस्थान में पारदर्शी प्रशासन भी सुनिश्चित करेंगी।

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