रुद्रप्रयाग। प्रशासन द्वारा अगले आदेश तक द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की यात्रा पर रोक लगाए जाने के बाद यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। तीर्थयात्रियों की आवाजाही पूरी तरह थमने से गौण्डार, बनातोली सहित अन्य पड़ावों पर होटल, होमस्टे, ढाबे और स्थानीय दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हुआ है।

मद्महेश्वर घाटी की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तीर्थाटन और पर्यटन पर निर्भर है। यात्रा सीजन के दौरान देश-विदेश से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के कारण स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों, घोड़ा-खच्चर संचालकों, पोर्टरों और अन्य सेवा प्रदाताओं को रोजगार मिलता है। यात्रा पर अचानक रोक लगने से इन लोगों की आय पर सीधा असर पड़ा है।

स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक, यात्रा सीजन को देखते हुए उन्होंने खाद्य सामग्री, पेय पदार्थ और अन्य जरूरी सामान का पर्याप्त भंडारण किया था। अब यात्रा बंद होने के कारण दुकानें खाली पड़ी हैं और लंबे समय तक कारोबार बंद रहने से सामान खराब होने की चिंता भी बनी हुई है। वहीं घोड़ा-खच्चर संचालकों और स्थानीय श्रमिकों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

व्यापारियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से यात्रा जल्द शुरू कराने की मांग की है, ताकि यात्रा से जुड़े लोगों को राहत मिल सके। हालांकि प्रशासन का कहना है कि बनातोली क्षेत्र में ट्रॉली के जरिए होने वाली आवाजाही को जोखिमपूर्ण पाए जाने के कारण यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मद्महेश्वर यात्रा पर रोक लगाई गई है।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं दुरुस्त होने के बाद यात्रा जल्द शुरू होगी और एक बार फिर मद्महेश्वर घाटी में तीर्थयात्रियों की आवाजाही के साथ कारोबार पटरी पर लौट सकेगा।