देहरादून। उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से कुछ बाघों को ओडिशा के चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में वन विभाग स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। बाघों के स्थानांतरण का उद्देश्य उनके बेहतर प्रबंधन, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाघों के साथ-साथ हाथी, तेंदुआ और कई अन्य वन्यजीवों का संरक्षण किया जाता है। रिजर्व में घायल या संघर्ष की परिस्थितियों में रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों के उपचार और देखभाल के लिए विशेष व्यवस्था भी मौजूद है।
वन्यजीव प्रबंधन के तहत ऐसे बाघों को रेस्क्यू सेंटर में रखा जाता है, जिन्हें किसी कारण से जंगल में वापस छोड़ना संभव नहीं होता। इनके स्वास्थ्य, व्यवहार और सुरक्षा की लगातार निगरानी की जाती है। कॉर्बेट में भी पशु चिकित्सा इकाई और क्विक रिस्पांस टीम के माध्यम से घायल एवं रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों की देखभाल की जाती है।
ओडिशा के रेस्क्यू एवं चिड़ियाघर परिसरों में भी बाघों के लिए निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे केंद्रों में प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित बाड़े, चिकित्सा सुविधा और देखभाल की व्यवस्था की जाती है। स्थानांतरण से पहले बाघों के स्वास्थ्य और यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा।
वन विभाग की ओर से बाघों को सुरक्षित तरीके से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के लिए विशेषज्ञों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें बाघों के स्वास्थ्य परीक्षण, परिवहन की व्यवस्था और नए स्थान पर अनुकूलन जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे।
कॉर्बेट प्रशासन पहले से ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से निपटने और रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों के उपचार पर विशेष ध्यान देता है। बाघों का प्रस्तावित स्थानांतरण इसी वन्यजीव प्रबंधन व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम रूप से कितने बाघों को ओडिशा भेजा जाएगा और उनकी शिफ्टिंग कब होगी, इसकी विस्तृत जानकारी विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
