देहरादून। उत्तराखंड में खरीफ खरीद सत्र 2026-27 के लिए सरकार ने 7 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। धान की सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू होकर 31 दिसंबर तक चलेगी। लक्ष्य को पूरा करने के लिए खाद्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन खरीद प्रक्रिया के सामने राइस मिलर्स के पुराने बकाये, भुगतान और भंडारण क्षमता जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
खाद्य मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय अधिकारियों और राइस मिलर्स संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आगामी खरीद सत्र की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में खरीद केंद्रों पर किसानों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने और खरीद शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए। सरकार ने इस बार साधारण धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसके साथ ही 12 हजार मीट्रिक टन मंडुवा खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिसका एमएसपी 5,205 रुपये प्रति क्विंटल है।
सरकारी खरीद की प्रक्रिया में राइस मिलर्स की भूमिका महत्वपूर्ण है। किसानों से खरीदे गए धान की मिलिंग के बाद चावल की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में मिलर्स से जुड़े पुराने भुगतान और बकाया चावल का निस्तारण खरीद व्यवस्था के लिए अहम है। विभाग ने मिलर्स को होने वाले भुगतान की प्रक्रिया तेज करने पर भी जोर दिया है। अब भुगतान 72 घंटे के बजाय 48 घंटे के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में करने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा बड़ी मात्रा में धान की खरीद के बाद उसके सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था भी विभाग के सामने चुनौती रहेगी। केंद्र सरकार ने भी खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है और नई भंडारण नीति के तहत अतिरिक्त क्षमता विकसित करने का प्रावधान किया है।
सरकार का प्रयास है कि खरीद केंद्रों पर किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो और धान की खरीद, उठान, मिलिंग तथा भंडारण की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से संचालित हो।

