देहरादून। उत्तराखंड वन विकास निगम में अधिकारियों की कमी का असर अब प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी नियमित अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी है। फिलहाल यह जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के रूप में संभाली जा रही है। हालिया प्रशासनिक फेरबदल में भी वन विकास निगम के एमडी का अतिरिक्त प्रभार यथावत रखा गया है।
जानकारी के अनुसार, वन विभाग में अधिकारियों की कमी के चलते कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारियां एक अधिकारी को एक से अधिक विभागों या संस्थानों की दी जा रही हैं। इसका असर वन विकास निगम के कामकाज पर भी पड़ रहा है। निगम में प्रबंध निदेशक का पद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से निगम की प्रशासनिक व्यवस्था, वन संसाधनों से जुड़े कार्यों और विभिन्न गतिविधियों की निगरानी की जाती है।
हाल ही में वन विभाग में भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों के अतिरिक्त प्रभार में बदलाव किया गया है। इसके बावजूद वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक का दायित्व अतिरिक्त प्रभार के तौर पर ही जारी रखा गया है।
विभागीय स्तर पर अधिकारियों की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। एक अधिकारी के पास कई जिम्मेदारियां होने से काम का दबाव बढ़ने के साथ-साथ निर्णय लेने और योजनाओं के क्रियान्वयन में भी अतिरिक्त समय लग सकता है। वन विकास निगम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में नियमित एमडी की नियुक्ति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
वन विभाग में हालिया बदलावों के बाद उम्मीद की जा रही है कि अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट होने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी। हालांकि, निगम के एमडी पद पर नियमित नियुक्ति कब तक होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में फिलहाल वन विकास निगम का प्रबंधन अतिरिक्त प्रभार के सहारे ही चलता रहेगा।
