उत्तरकाशी। विश्वप्रसिद्ध दयारा बुग्याल में करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर सदियों पुरानी लोक परंपरा अढूंडी यानी बटर फेस्टिवल पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। बारिश के बीच ग्रामीणों और देश-दुनिया से पहुंचे पर्यटकों ने दूध, मक्खन और मट्ठे से होली खेलकर इस अनूठे पर्व का आनंद लिया।
उत्सव के दौरान राधा-कृष्ण के मनमोहक नृत्य, लोकगीत, देव डोलियों और देव पशुवाओं ने आयोजन की रंगत और बढ़ा दी। रैथल, नटीण, बंद्राणी, क्यार्क और भटवाड़ी समेत पंचगाईं क्षेत्र के ग्रामीणों की सहभागिता से बटर फेस्टिवल भव्य नजर आया।
बटर फेस्टिवल केवल मनोरंजन का पर्व नहीं है, बल्कि यह पशुपालन, प्रकृति, लोक आस्था और सामुदायिक जीवन के बीच सदियों पुराने रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। पिछले वर्ष धराली आपदा के कारण यह पर्व सादगी से मनाया गया था, जबकि इस बार ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला।
खराब मौसम के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। हालांकि मुख्यमंत्री के गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट ने कार्यक्रम में पहुंचकर दयारा बुग्याल के विकास, नेचर टूरिज्म और शीतकालीन स्कीइंग को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह करने का भरोसा दिलाया।
दयारा विकास पर्यटन समिति के अध्यक्ष मनोज राणा ने कहा कि लोक संस्कृति बचेगी, तो बुग्याल भी बचेंगे। इसी उद्देश्य के साथ हर साल दयारा बुग्याल में बटर फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है।
