रिपोर्टर – एस पी अरोड़ा
देहरादून। उत्तराखंड के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में अन्य विभागों से अधिकारियों की तैनाती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि विभाग में लगातार बाहरी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभाग के निदेशक पद पर करीब दो महीने पहले एक अधिकारी की तैनाती के बाद अन्य विभागों से अधिकारियों को लाने का सिलसिला शुरू होने का दावा किया जा रहा है। आरोपों के मुताबिक शिक्षा विभाग में उपसचिव के पद पर तैनात रहे विभूति कर्म को भी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में लाया गया है। इसके अलावा एक अन्य अधिकारी की तैनाती की जा चुकी है, जबकि महिला सशक्तिकरण विभाग से भी एक अधिकारी को लाने की तैयारी की बात सामने आ रही है।
सबसे गंभीर सवाल शिक्षा विभाग से आए अधिकारी की पूर्व में हुई जांच को लेकर उठ रहे हैं। वर्ष 2025 में उनके खिलाफ एक शिकायत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंची थी। शिकायत पर मुख्यमंत्री स्तर से सीबीसीआईडी जांच के आदेश दिए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, आरोप है कि बाद में जांच की दिशा बदली गई और मामला विभागीय जांच तक सीमित रह गया। इसके बाद अधिकारी को जांच में राहत मिलने की बात कही जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वहीं, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्रदर्शनी के खर्च और भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि प्रदर्शनी में काम करने वाले ठेकेदारों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने के साथ वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, इस संबंध में भी संबंधित विभाग या अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कुल मिलाकर, अन्य विभागों से अधिकारियों की लगातार तैनाती और विभागीय खर्चों को लेकर उठ रहे आरोपों ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले में शासन स्तर से निष्पक्ष जांच और स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है।
