ऊधमसिंह नगर। उत्तराखंड में इस बार चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन होने के बावजूद बाजार में इसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं। प्रदेश की चीनी मिलों ने कुल 29.16 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है, लेकिन त्योहारी सीजन से पहले कीमतों में तेजी ने उपभोक्ताओं और मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।

गन्ना आयुक्त कार्यालय की 18 जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की चीनी मिलों में कुल 300.69 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई और औसत रिकवरी 9.70 प्रतिशत रही। उत्पादन के मामले में इकबालपुर चीनी मिल सबसे आगे रही। मिल ने 114.02 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 12.02 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। इसके बाद लिब्बरहेड़ी मिल ने 60.13 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई से 6.34 लाख क्विंटल चीनी तैयार की।

सितारगंज चीनी मिल ने 51.79 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 3.50 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। वहीं बाजपुर, नादेही, किच्छा और डोईवाला चीनी मिलों ने मिलकर 7.60 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में गन्ने का रकबा बढ़ा है और चीनी उत्पादन में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

इसके बावजूद किसानों और बाजार से जुड़ी एक बड़ी चिंता सामने आई है। किसान नेताओं का कहना है कि प्रदेश में उत्पादित करीब 80 प्रतिशत चीनी दूसरे राज्यों के बड़े व्यापारियों को बेच दी जाती है। इससे स्थानीय बाजार में कीमतों पर असर पड़ रहा है।

वहीं, किसानों का पुराना बकाया भी चिंता का विषय बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार काशीपुर की बंद पड़ी चीनी मिल पर वर्ष 2007 से 2019 तक किसानों के 125.52 करोड़ रुपये, जबकि इकबालपुर मिल पर 15.13 करोड़ रुपये बकाया हैं। कुल बकाया राशि करीब 146.10 करोड़ रुपये है।

त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण चीनी की बढ़ती कीमतों का असर मिठाई कारोबार और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है।