देहरादून। भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में देहरादून में अहम बैठक हुई। दो दिवसीय उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक का मुख्य फोकस विवादित क्षेत्रों के समाधान और सीमा निर्धारण के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर रहा।

बैठक में भारत की ओर से गृह मंत्रालय और विदेश सेवा से जुड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जबकि नेपाल का प्रतिनिधिमंडल भी वार्ता में शामिल हुआ। अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र में बदलती भौगोलिक परिस्थितियों और नदियों के मार्ग में होने वाले बदलाव को भी महत्वपूर्ण विषय माना। दोनों देशों के बीच सीमा के कई हिस्सों में नदियों के रास्ते बदलने के कारण समय-समय पर विवाद की स्थिति पैदा होती रही है।

बताया गया कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद से सर्वे और सीमांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे पुराने नक्शों, सीमा स्तंभों और मौजूदा भौगोलिक स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से मिलान किया जा सकेगा। 14 अगस्त को लखनऊ में हुई अधिकारियों की बैठक में भी आधुनिक तकनीक के जरिए सीमा विवादों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी थी।

भारत-नेपाल सीमा से जुड़े प्रमुख विवादों में उत्तराखंड के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्र शामिल हैं। नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है, जबकि भारत इन्हें अपना हिस्सा मानता है। सीमा विवाद के चलते दोनों देशों के बीच समय-समय पर राजनयिक स्तर पर चर्चा होती रही है।

देहरादून में हुई बैठक को दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने और संवेदनशील सीमा मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब आधुनिक तकनीक से होने वाले सर्वे और आगे की बातचीत पर दोनों देशों की नजर रहेगी।