देहरादून। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग के बीच प्रदेश को अतिरिक्त बिजली कोटा मिलने से राहत की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों के बाद केंद्र स्तर से राज्य के लिए अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और संभावित कटौती पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
दरअसल, मानसून के दौरान राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण भी बिजली की खपत बढ़ी है। दूसरी ओर, ऊर्जा उत्पादन और उपलब्धता में उतार-चढ़ाव के चलते बिजली आपूर्ति को लेकर दबाव बना हुआ था। ऐसे में अतिरिक्त बिजली कोटा मिलने को राज्य के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री धामी ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है।
उत्तराखंड में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा जल विद्युत परियोजनाओं पर निर्भर है। बारिश के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ने से उत्पादन में मदद मिलती है, लेकिन कई बार मौसम और तकनीकी परिस्थितियों के कारण उत्पादन प्रभावित भी होता है। ऐसे में अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता राज्य की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।
बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार पहले ही ऊर्जा निगमों की सेवाओं को आवश्यक सेवा घोषित कर चुकी है। यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल की सेवाओं में छह महीने तक हड़ताल पर रोक लगाई गई है, ताकि बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था निर्बाध बनी रहे।
अतिरिक्त बिजली कोटे से प्रदेश में बिजली संकट का दबाव कम होने और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
