देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि SIR के दौरान फॉर्म-7 के जरिए वैध मतदाताओं के नाम हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं। पार्टी ने इस मामले को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से शिकायत कर जांच की मांग की है।
कांग्रेस का आरोप है कि कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति या मोबाइल नंबर से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की गई हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि कई ऐसे मतदाता भी सामने आए हैं, जो अपने बताए गए पते पर रह रहे हैं, फिर भी उनके नाम हटाने को लेकर आपत्तियां दर्ज की गईं। कांग्रेस ने इसे गंभीर मामला बताते हुए फर्जी आपत्तियों की जांच कराने और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग की है।
पार्टी का दावा है कि कुछ फॉर्म-7 में दिल्ली, बरेली और गाजियाबाद के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि बाहरी नंबरों से उत्तराखंड के मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज की गई हैं, तो उनकी सत्यता की जांच जरूरी है।
वहीं, निर्वाचन विभाग का कहना है कि SIR की प्रक्रिया नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से चल रही है। CEO कार्यालय ने बताया कि अधिक दावे और आपत्तियां वाले जिलों में अतिरिक्त वरिष्ठ अधिकारियों को पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया गया है। साथ ही राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस पूरे विवाद के बीच SIR को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि कथित फर्जी आपत्तियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह आंदोलन और कानूनी कदम उठा सकती है।
