उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश की नदियों में जमा सिल्ट न हटाए जाने के मामले में सख्ती दिखाई है। स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अब तक सिल्ट हटाने के लिए की गई कार्रवाई की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। याचिका के अनुसार, चोरगलिया निवासी भुवन चंद्र पोखरिया ने अदालत का ध्यान नंधौर, गौला, कोसी, गंगा और दाबका नदियों में बढ़ते भूकटाव और बाढ़ की समस्या की ओर दिलाया था।
याचिका में कहा गया कि नदियों में जमा सिल्ट के कारण उनके मुहाने अवरुद्ध हो रहे हैं और समय रहते चैनलाइजेशन नहीं होने से आसपास के आबादी क्षेत्रों में जलभराव और भूमि कटाव जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया कि हाईकोर्ट के पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन अब तक नहीं किया गया है।
अदालत ने पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि नदियों का प्राकृतिक बहाव बनाए रखने के लिए सिल्ट हटाना आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने मानसून से पहले इस कार्य को पूरा कराने की मांग की, यह कहते हुए कि 15 जून के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अब राज्य सरकार को निर्धारित समयसीमा में जवाब और कार्यवाही रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिससे आगामी मानसून में संभावित संकट को टाला जा सके।
