असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर केंद्र सरकार की ऊर्जा नीति और सामाजिक मुद्दों पर तीखा हमला बोला है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख ओवैसी ने देश के पेट्रोलियम भंडार को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा बेहद नाजुक स्थिति में है।
ओवैसी के अनुसार, भारत के पास अपना ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ केवल 9.5 दिनों के लिए ही पर्याप्त है। उन्होंने दावा किया कि यदि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के स्टॉक को भी इसमें जोड़ दिया जाए, तो कुल भंडार महज 74 दिनों तक ही चल सकता है। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर ठोस कदम उठाने के बजाय सरकार जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
गैस की बढ़ती कीमतों पर तंज कसते हुए ओवैसी ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्षों में मासूम लोग प्रभावित हो रहे थे, तब किसी ने उनकी चिंता नहीं की। लेकिन जैसे ही इन परिस्थितियों का असर देश में गैस आपूर्ति पर पड़ा, तब शांति और स्थिरता की बातें होने लगीं।
उन्होंने ‘बॉयकॉट’ की राजनीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश के भीतर मुसलमानों के बहिष्कार की बात की जाती है, तो फिर खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात क्यों जारी है। ओवैसी ने इसे दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि एक ओर नफरत की राजनीति की जाती है, जबकि दूसरी ओर उन्हीं देशों पर ऊर्जा के लिए निर्भरता बनी हुई है।
ओवैसी ने कहा कि यह विरोधाभास देश के दीर्घकालिक हितों के लिए उचित नहीं है और सरकार को वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
