देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में छात्रों के सर्वांगीण विकास और पढ़ाई के बोझ को कम करने के उद्देश्य से ‘नो बैग डे’ को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों और स्कूलों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि इस दिन विद्यार्थी बिना स्कूल बैग के विद्यालय आएंगे और विभिन्न रचनात्मक, व्यावहारिक तथा कौशल आधारित गतिविधियों में भाग लेंगे। यह पहल नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के अनुरूप लागू की जा रही है।

एससीईआरटी के निर्देशों के अनुसार ‘नो बैग डे’ पर पारंपरिक कक्षाओं के बजाय विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा के अनुरूप गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें कला, हस्तशिल्प, चित्रकला, संगीत, योग, खेलकूद, बागवानी, पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान प्रयोग, संचार कौशल, स्थानीय कला एवं संस्कृति तथा जीवन कौशल से जुड़ी गतिविधियां शामिल होंगी। इसका उद्देश्य छात्रों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और व्यवहारिक ज्ञान का विकास करना है।

शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि ‘नो बैग डे’ को केवल औपचारिक कार्यक्रम न बनाकर विद्यार्थियों के लिए सीखने का रोचक अनुभव बनाया जाए। गतिविधियों में स्थानीय संसाधनों, शिक्षकों, अभिभावकों और विशेषज्ञों की सहभागिता भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही प्रत्येक विद्यालय को आयोजित कार्यक्रमों की रिपोर्ट और फोटो विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इसकी नियमित निगरानी की जा सके।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से बच्चों पर किताबों का बोझ कम होगा और उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक और शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विभाग को उम्मीद है कि ‘नो बैग डे’ के माध्यम से स्कूलों में सीखने का वातावरण अधिक आनंददायक बनेगा और बच्चों की शिक्षा के प्रति रुचि भी बढ़ेगी।

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