ऋषिकेश। ऋषिकेश में यातायात की समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित बाईपास परियोजना के चलते हजारों पेड़ों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। परियोजना के लिए कुल 3,998 पेड़ों को हटाए जाने की आशंका है। इससे क्षेत्र की हरियाली और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। वन विभाग ने भी पेड़ों की कटाई की संख्या कम करने की जरूरत पर जोर दिया है।
ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए बाईपास परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मार्ग के बनने से शहर में वाहनों का दबाव कम करने और यात्रियों को जाम से राहत दिलाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने की जरूरत पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सवाल भी खड़े कर रही है।
वन विभाग के अनुसार, परियोजना के निर्धारित एलाइनमेंट से प्रभावित होने वाले पेड़ों की संख्या कम करने के लिए कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए हैं। अगस्त में वन भूमि हस्तांतरण नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने परियोजना स्थल का निरीक्षण किया था। इस दौरान पेड़ों का दोबारा आकलन करने और वास्तविक जरूरत के आधार पर कटान की संख्या घटाने को कहा गया था।
13 किलोमीटर लंबा होगा बाईपास
ऋषिकेश बाईपास परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंपी गई है। प्रस्तावित बाईपास लगभग 13 किलोमीटर लंबा होगा। इसके निर्माण के लिए करीब 47 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता बताई गई है। ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग चारधाम यात्रा के साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। शहर में सड़क की सीमित चौड़ाई और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। बाईपास बनने से इस समस्या में कमी आने की उम्मीद है।
1,204 पेड़ों के प्रत्यारोपण की योजना
परियोजना के लिए चिह्नित 3,998 पेड़ों में से 1,204 पेड़ों के प्रत्यारोपण की योजना बनाई गई है। वन विभाग ने जैव विविधता पार्क के शुरुआती हिस्से में लगभग 250 मीटर लंबे भूमिगत मार्ग की योजना में भी कुछ बदलाव करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की आवाजाही को सुगम बनाना और पेड़ों को होने वाले नुकसान को कम करना है।
इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए देहरादून और नरेंद्रनगर वन प्रभागों के लिए 22 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है।
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय के अनुसार, परियोजना में पेड़ों को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। वन विभाग के सहयोग से पेड़ों के प्रत्यारोपण का कार्य भी किया जाएगा। अब परियोजना के निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अहम चुनौती है।
